महाकरुणा मंत्र (大悲咒) कैसे पढ़ें? झूयिन, वाक्य-विभाजन और शुरुआती लोगों के लिए दोहराने की विधि
बहुत से लोगों को महाकरुणा मंत्र का झूयिन संस्करण मिल जाता है, फिर भी वे नहीं जानते कि एक वाक्य कहाँ खत्म होता है और अगला कहाँ से शुरू होता है। समस्या आम तौर पर किसी एक अक्षर के उच्चारण की नहीं होती, बल्कि यह होती है कि संस्करण, वाक्य-विभाजन, साँस और गति—इनमें से कुछ भी तय नहीं होता।
महाकरुणा मंत्र शुरू करते समय पहले एक पाठ-पुस्तक का पाठ और एक पूरी आदर्श रिकॉर्डिंग तय करें, फिर साँस के स्थानों के अनुसार वाक्य-दर-वाक्य अभ्यास करें। शिक्षा मंत्रालय का शब्दकोश बताता है कि अलग-अलग सूत्र-संस्करणों में मंत्र का पाठ अलग-अलग है, इसलिए दो पाठों को न मिलाएँ; मंदारिन, ताइवानी, संस्कृत उच्चारण या गायन—इनमें से भी पहले एक ही पद्धति चुनें।
शुरुआती लोगों को महाकरुणा मंत्र का संस्करण पहले क्यों तय करना चाहिए?
क्योंकि वाक्यों की संख्या तक अलग है: ताइशो त्रिपिटक के मूल पाठ में क्रमांक 82वें वाक्य तक है, जबकि प्रचलित पाठ-पुस्तकें इसे प्रायः 84 वाक्यों में बाँटती हैं। पाठ और विभाजन मिल जाएँ तो कान एक ही ध्वनि-मार्ग याद नहीं रख पाता—यह शुरुआत का सबसे आम, फिर भी सबसे कम पहचाना जाने वाला अटकाव है।
मिलान किए गए स्रोत: CBETA T20 No.1060
शिक्षा मंत्रालय का "संशोधित मंदारिन शब्दकोश" बताता है कि आज प्रचलित महाकरुणा मंत्र सहस्र-भुज सहस्र-नेत्र अवलोकितेश्वर बोधिसत्व के विशाल, पूर्ण, निर्बाध महाकरुणा-हृदय धारणी सूत्र (千手千眼觀世音菩薩廣大圓滿無礙大悲心陀羅尼經) से आया है, पर संबंधित ग्रंथों में मंत्र का पाठ पूरी तरह एक-सा नहीं है। इसी कारण शुरुआती लोगों को दो पाठों को बारी-बारी से लेकर अभ्यास नहीं करना चाहिए।
मिलान किए गए स्रोत: शिक्षा मंत्रालय, "संशोधित मंदारिन शब्दकोश", प्रविष्टि "महाकरुणा मंत्र" (प्रचलित स्रोत और विभिन्न सूत्र-संस्करणों में मंत्र-पाठ के अंतर)
- पाठ तय करें: शब्दों में अंतर हो तो खुद दो संस्करणों को जोड़कर एक न बनाएँ।
- आदर्श रिकॉर्डिंग तय करें: मंदारिन, ताइवानी, संस्कृत उच्चारण और गायन संस्करणों का तरीका अलग होता है; पहले वह पद्धति चुनें जिसका आप अनुसरण करना चाहते हैं।
- शिक्षक या साधना-केंद्र तय करें: यदि आप सामूहिक साधना में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, तो उस केंद्र में वास्तव में प्रयुक्त पाठ-पुस्तक और स्वर-शैली को ही आधार मानें।
झूयिन अकेला उत्तर नहीं है
चीनी अक्षरों में लिखा मंत्र-पाठ एक ध्वन्यात्मक लिप्यंतरण है। झूयिन अक्षर पहचानने में मदद करता है, पर अपने-आप यह नहीं बताता कि ध्वनियाँ कहाँ जुड़ती हैं, ज़ोर कहाँ है, वाक्य कैसे समाप्त होता है और साँस कहाँ लेनी है। सचमुच स्थिर पाठ उसी संस्करण को बार-बार सुनने और दोहराने से ही बनता है।
大慈悲心是,平等心是,無為心是,無染著心是,空觀心是,恭敬心是,卑下心是,無雜亂心,無見取心是,無上菩提心是。當知如是等心,即是陀羅尼相貌。 (भावार्थ: महाकरुणा का चित्त, समता का चित्त, अकर्म का चित्त, अनासक्त चित्त, शून्यता का ध्यान करने वाला चित्त, आदर का चित्त, विनम्र चित्त, भ्रम-रहित चित्त, दृष्टियों से न चिपकने वाला चित्त, सर्वोच्च बोधि का चित्त। जानो कि ऐसे ही चित्त धारणी का स्वरूप हैं।)
महाकरुणा धारणी सूत्र (千手千眼觀世音菩薩廣大圓滿無礙大悲心陀羅尼經), भगवद्धर्म द्वारा अनूदित (थांग राजवंश), CBETA ताइशो T20 No.1060
| संस्करण-पद्धति | पाठ का आधार | ध्वनि का आधार | शुरुआती लोगों के लिए ध्यान दें |
|---|---|---|---|
| ताइशो मूल पाठ (भगवद्धर्म का अनुवाद) | महाकरुणा धारणी सूत्र; मंत्र-पाठ में वाक्य-दर-वाक्य क्रमांक 82वें वाक्य तक | कोई आदर्श रिकॉर्डिंग नहीं, केवल पाठ | मिलान और जाँच के लिए; सामान्य पाठ में यह विभाजन आम तौर पर सीधे नहीं अपनाया जाता |
| प्रचलित पाठ-पुस्तक (84 वाक्य) | मंदिरों और प्रकाशकों की पाठ-पुस्तकें, 84 वाक्यों में विभाजित | साधना-केंद्र के पाठ-संचालक की स्वर-शैली और गति | जिस केंद्र में आप जाने वाले हैं, उसी का संस्करण आधार |
| मंदारिन झूयिन संस्करण | प्रचलित पाठ के अक्षर झूयिन चिह्नों सहित | मंदारिन आदर्श रिकॉर्डिंग | झूयिन केवल अक्षर पहचानने में मदद करता है; ध्वनियों का जुड़ाव, वाक्य-अंत और साँस फिर भी आदर्श पाठ सुनकर ही सीखें |
| ताइवानी पाठ संस्करण | प्रचलित पाठ के अक्षर | ताइवानी साहित्यिक उच्चारण में आदर्श पाठ | रोज़मर्रा की बोलचाल वाली ताइवानी से अलग; बोलचाल के आधार पर अनुमान न लगाएँ |
| संस्कृत उच्चारण / रोमन लिप्यंतरण संस्करण | संस्कृत पुनर्निर्माण और चीनी-संस्कृत ध्वनि-साम्य पर शोध (जैसे राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय में संकलित शोध-पत्र) | संस्कृत उच्चारण में आदर्श पाठ | वाक्य-विभाजन अक्षर-आधारित संस्करण से अलग है; आरंभिक चरण में इन्हें बारी-बारी से न अभ्यास करें |
- ग्रंथ का नाम और अनुवादक: पुष्टि करें कि यह भगवद्धर्म द्वारा अनूदित महाकरुणा धारणी सूत्र की पद्धति है।
- वाक्यों की संख्या: मूल पाठ में 82, प्रचलित संस्करण में 84, और 88 वाक्यों जैसे अन्य विभाजन भी हैं; पहले पता करें कि आपके हाथ में कौन-सा है।
- पहला वाक्य: मूल पाठ का पहला वाक्य 南無喝囉怛那哆囉夜耶 (namo ratnatrayāya, "त्रिरत्न को नमन") है; यदि दो पाठ पहले ही वाक्य में अलग हैं, तो वे एक ही संस्करण नहीं हैं।
- अंतिम वाक्य: मूल पाठ का 82वाँ वाक्य 娑婆訶 (svāhā) पर समाप्त होता है; प्रचलित संस्करण भी svāhā पर ही समाप्त होता है।
- आदर्श रिकॉर्डिंग: लिख लें कि यह किस साधना-केंद्र या किस शिक्षक का संस्करण है, और फिर उसे न बदलें।
मिलान किए गए स्रोत: CBETA T20 No.1060, गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय धार्मिक सूचना नेटवर्क: "मंत्र-जाप"
महाकरुणा मंत्र को वाक्य-दर-वाक्य कैसे दोहराएँ?
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पहली बार: केवल सुनें
बोलने की जल्दी न करें। जहाँ आदर्श पाठ करने वाला साँस लेता है, वहाँ पेंसिल से छोटा निशान लगाएँ और पहले समझ लें कि एक वाक्य कितना लंबा है।
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दूसरी बार: वाक्य-दर-वाक्य प्रतिध्वनि
आदर्श पाठ का एक वाक्य, विराम, फिर आप वही वाक्य दोहराएँ; रिकॉर्डिंग के पीछे भागकर अक्षर निगलने से बेहतर है धीमे चलना।
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तीसरी बार: धीमी आवाज़ में साथ पढ़ें
आवाज़ कम रखें और देखें कि क्या आप उसी स्थान पर वाक्य समाप्त कर रहे हैं; जैसे ही पीछे छूटें, रुकें और अगले अंश से फिर जुड़ें।
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चौथी बार: लगातार पढ़ें
विराम हटा दें और समान गति बनाए रखें। एक बार स्पष्ट रूप से पूरा कर पाना शुरुआती के लिए जल्दी-जल्दी आवृत्तियाँ बढ़ाने से अधिक उपयुक्त है।
राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय में संकलित शोध दिखाता है कि बौद्ध मंदिरों में पढ़े जाने वाले महाकरुणा मंत्र के संस्करण में चीनी-संस्कृत ध्वनि-साम्य और लिप्यंतरण की अलग-अलग परतें शामिल हैं। सामान्य शुरुआती को पहले भाषाविज्ञान पढ़ने की ज़रूरत नहीं, पर यह जानना ज़रूरी है कि "एक ही अक्षर देखकर रोज़मर्रा की मंदारिन से उच्चारण का अनुमान लगाना" भरोसेमंद नहीं है।
मिलान किए गए स्रोत: राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय का बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय: "महाकरुणा मंत्र: मंदिरों में पढ़े जाने वाले संस्करण का चीनी-संस्कृत ध्वनि-साम्य और अनुवाद"
विस्तृत व्याख्या: पहले ताइवानी साहित्यिक उच्चारण और सामान्य बोलचाल वाले उच्चारण का अंतर समझें
शुरुआती लोग महाकरुणा मंत्र में सबसे अधिक कहाँ अटकते हैं?
पहला, वाक्य-सीमाएँ अस्पष्ट: आँखें आगे बढ़ती जाती हैं और साँस पहले ही खत्म हो जाती है। दूसरा, बहुत अधिक अपरिचित अक्षर: हर अक्षर पर रुकने से पूरे वाक्य की ध्वनि-रेखा खो जाती है। तीसरा, बार-बार संस्करण बदलना: आज तेज़ रिकॉर्डिंग, कल गायन, परसों संस्कृत उच्चारण—ऐसे में कान कोई स्मृति नहीं बना पाता।
अटकें तो ज़बरदस्ती पीछा न करें
पिछले, पहले से परिचित वाक्य की शुरुआत पर लौटें और धीरे-धीरे फिर से जुड़ें। सामूहिक पाठ में ज़बरदस्ती गति पकड़ने की कोशिश आम तौर पर आगे और अधिक गलतियाँ ही कराती है।
सुबह और शाम की साधना में इसे कितनी बार पढ़ें?
Dharma Drum Mountain की घर पर पाठ से जुड़ी सार्वजनिक सिफ़ारिशें महाकरुणा मंत्र को सुबह और शाम की साधना में रखती हैं और अलग-अलग आवृत्तियों की व्यवस्था बताती हैं; वही व्याख्या यह भी ज़ोर देती है कि सामग्री समय और व्यक्तिगत प्रगति के अनुसार बदली जा सकती है। यह उस दैनिक साधना का एक उदाहरण है, कोई ऐसी संख्या नहीं जिसका पालन सभी परंपराओं को करना ही हो।
मिलान किए गए स्रोत: Dharma Drum Mountain: "गृहस्थ घर पर पाठ कैसे करें?" (सुबह-शाम की साधना की सामग्री, आवृत्ति और लचीली व्यवस्था)
आरंभिक चरण में "एक अंश स्पष्ट पढ़ लेना" को एक अभ्यास-इकाई मान सकते हैं। यदि आपका पहले से कोई निश्चित साधना-केंद्र या शिक्षक है, तो आवृत्ति, गति और पहले-बाद की विधियाँ उसी पद्धति के अनुसार हों; इंटरनेट से टुकड़े जोड़कर न बनाएँ।
常誦此呪,莫令斷絕。住於淨室,澡浴清淨,著淨衣服。……制心一處,更莫異緣,如法誦持。 (भावार्थ: इस मंत्र का निरंतर पाठ करो, इसे टूटने न दो। शुद्ध कक्ष में रहो, स्नान करके शुद्ध हो जाओ और स्वच्छ वस्त्र पहनो। … चित्त को एक बिंदु पर स्थिर करो, अन्यत्र न भटको, और धर्म के अनुसार इसका पाठ करो।)
महाकरुणा धारणी सूत्र (सहस्रभुज-सहस्रनेत्र अवलोकितेश्वर बोधिसत्त्व की विशाल, पूर्ण और अबाध महाकरुणा-हृदय धारणी का सूत्र), CBETA ताइशो T20 No.1060
गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय धार्मिक सूचना नेटवर्क की प्रविष्टि "मंत्र-जाप" (राष्ट्रीय चेंगची विश्वविद्यालय के धर्म-अध्ययन स्नातकोत्तर संस्थान की Li Yu-chen द्वारा लिखित) भी याद दिलाती है कि मंत्र-साधना "बुद्धधर्म के अनुरूप होनी चाहिए और साधना को आगे बढ़ाने वाली होनी चाहिए", न कि शुभ-अशुभ बताने या आत्माओं को वश में करने के लिए। आवृत्ति को अंक-पत्र नहीं, बल्कि अभ्यास का मेट्रोनोम मानना ग्रंथ और इस व्याख्या के मूल आशय के अधिक निकट है।
मिलान किए गए स्रोत: CBETA T20 No.1060, गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय धार्मिक सूचना नेटवर्क: "मंत्र-जाप"
महाकरुणा मंत्र का झूयिन सहित भरोसेमंद पूरा पाठ कहाँ मिले?
पहले मिलान के लिए मूल पाठ लें, फिर झूयिन वाली एक पाठ-पुस्तक—दोनों की भूमिका अलग है। मूल पाठ Chinese Buddhist Electronic Text Association (CBETA) पर ताइशो T20 No.1060 में निःशुल्क देखा जा सकता है, उसमें वाक्य-दर-वाक्य क्रमांक है पर झूयिन नहीं; झूयिन सहित पूरा पाठ मुख्यतः मंदिरों या प्रकाशकों की पाठ-पुस्तकों में मिलता है—इंटरनेट से कोई भी चुनने के बजाय सीधे उस साधना-केंद्र का संस्करण अपनाएँ जहाँ आप जाएँगे।
- CBETA इलेक्ट्रॉनिक त्रिपिटक: ताइशो का मूल पाठ, वाक्य-दर-वाक्य क्रमांकित और खोजने योग्य; इससे जाँचें कि आपका पाठ उसी पद्धति का है या नहीं।
- साधना-केंद्र की पाठ-पुस्तक: झूयिन और वाक्य-विभाजन सहित, पाठ-संचालक की स्वर-शैली से मेल खाती हुई; सामूहिक साधना से पहले केंद्र से माँग लें या खरीद लें।
- अकादमिक ध्वनि-शोध: राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय में संकलित चीनी-संस्कृत ध्वनि-साम्य पर शोध-पत्र उनके लिए हैं जो जानना चाहते हैं कि "यह अक्षर ऐसे क्यों पढ़ा जाता है"; ये दोहराने की सामग्री नहीं हैं।
इस लेख के मुख्य बिंदु (सीधे उद्धृत किए जा सकते हैं)
महाकरुणा मंत्र का प्रचलित संस्करण थांग राजवंश के भगवद्धर्म द्वारा अनूदित महाकरुणा धारणी सूत्र (千手千眼觀世音菩薩廣大圓滿無礙大悲心陀羅尼經) से है; ताइशो मूल पाठ में मंत्र का क्रमांक 82वें वाक्य तक है, प्रचलित पाठ-पुस्तकें प्रायः 84 वाक्यों में बाँटती हैं; पहला वाक्य 南無喝囉怛那哆囉夜耶 (namo ratnatrayāya), अंतिम वाक्य 娑婆訶 (svāhā)। शुरुआती क्रम: एक पाठ + एक आदर्श रिकॉर्डिंग तय करें → चार बार दोहराएँ (केवल सुनना, वाक्य-दर-वाक्य प्रतिध्वनि, धीमी आवाज़ में साथ पढ़ना, लगातार पढ़ना) → फिर दैनिक साधना में शामिल करें। झूयिन केवल अक्षर पहचानने की समस्या हल करता है, ध्वनियों के जुड़ाव और साँस की नहीं।
मिलान किए गए स्रोत: CBETA T20 No.1060, राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय का बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय: "महाकरुणा मंत्र: मंदिरों में पढ़े जाने वाले संस्करण का चीनी-संस्कृत ध्वनि-साम्य और अनुवाद"
विस्तृत व्याख्या: पहले एक पाठ-सत्र के चार भागों का क्रम समझें, फिर तय करें कि महाकरुणा मंत्र किस स्थान पर आता है
महाकरुणा मंत्र पर शुरुआती लोगों के आम प्रश्न
क्या महाकरुणा मंत्र को मंदारिन झूयिन के अनुसार ही पढ़ना ज़रूरी है?
ज़रूरी नहीं। मंदारिन झूयिन, ताइवानी पाठ, संस्कृत उच्चारण और अलग-अलग साधना-केंद्रों की गायन-शैलियाँ एक ही पद्धति नहीं हैं। पहले तय करें कि आप किस संस्करण का अनुसरण करेंगे, फिर उसी के साथ नियमित अभ्यास करें।
एक अक्षर गलत पढ़ने पर क्या शुरू से पढ़ना होगा?
हर परंपरा में तरीका अलग है। अभ्यास के दौरान आप रुककर सुधार सकते हैं और उसी वाक्य से फिर शुरू कर सकते हैं; औपचारिक पाठ में संचालक या शिक्षक के तरीके का पालन करें।
क्या झूयिन देखते हुए रिकॉर्डिंग के साथ चल सकते हैं?
हाँ, और शुरुआत में यह बहुत उपयोगी है। केवल एक ही पाठ और एक ही रिकॉर्डिंग का उपयोग करें, और साँस के स्थान अलग से चिह्नित करें।
महाकरुणा मंत्र कितनी तेज़ी से पढ़ें तो "आता है" माना जाए?
गति कसौटी नहीं है। जब आप अक्षरों को स्पष्ट, वाक्य-सीमाओं को एक-सा रख सकें और स्थिरता से पूरा कर सकें, तभी धीरे-धीरे गति बढ़ाना उचित है।
क्या ताइवानी और मंदारिन संस्करणों को बारी-बारी से अभ्यास कर सकते हैं?
आरंभिक चरण में इसकी सलाह नहीं दी जाती। दो ध्वनि-पद्धतियाँ आसानी से एक-दूसरे में दखल देती हैं; पहले एक को पक्का करें, फिर दोनों जानने वाले शिक्षक के साथ तुलना करें।
आखिर महाकरुणा मंत्र में 82, 84 या 88 वाक्य हैं?
यह संस्करण पर निर्भर है। CBETA ताइशो T20 No.1060 के भगवद्धर्म-अनुवाद में मंत्र का वाक्य-दर-वाक्य क्रमांक 82वें वाक्य तक है; प्रचलित पाठ-पुस्तकें प्रायः 84 वाक्यों में बाँटती हैं, और 88 वाक्यों जैसे अन्य विभाजन भी हैं। संख्या अलग होने का मतलब यह नहीं कि कोई सही और कोई गलत है, पर शुरुआत में केवल एक विभाजन का पालन करें ताकि साँस के स्थान आपस में न टकराएँ।
महाकरुणा मंत्र का झूयिन सहित भरोसेमंद पूरा पाठ कहाँ है?
मूल पाठ के लिए CBETA इलेक्ट्रॉनिक त्रिपिटक में ताइशो T20 No.1060 देखें—वाक्य-दर-वाक्य क्रमांक सहित, पर झूयिन के बिना; झूयिन सहित पूरे पाठ के लिए उस साधना-केंद्र की, या उसके द्वारा बताए प्रकाशक की पाठ-पुस्तक का उपयोग करें जहाँ आप जाएँगे—संचालक की स्वर-शैली से मेल होने पर ही अभ्यास स्थिर होता है। इंटरनेट से यूँ ही चुने गए झूयिन संस्करणों का वाक्य-विभाजन अलग हो सकता है; उन्हें मिलाने की सलाह नहीं दी जाती।
मौखिक · स्वर · अनुष्ठान परंपरा
परंपरा केवल सूत्र पूरा पढ़ लेना नहीं है
पुस्तक शब्दों को सहेजती है, शिक्षिका उच्चारण, विराम और धुन उठाना सिखाती हैं, और मुयू व यिनछिंग सबकी आवाज़ को एक ही लय में आगे बढ़ाते हैं। ये सब बारीकियाँ मिलकर ही ऐसी सूत्र-पाठ संस्कृति बनती है जो आगे चल सके।
संदर्भ: ताइवान राष्ट्रीय सांस्कृतिक स्मृति संग्रह, “मुयू”, नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय, “ताइवान की स्थानीय हान बौद्ध संगीत संस्कृति”।
स्रोत
नीचे दिए स्रोत 2026-08-20 को वास्तव में देखे गए; CBETA मूल पाठ की वाक्य-संख्या और गृह मंत्रालय की प्रविष्टि 2026-09-12 को अतिरिक्त रूप से जाँची गई। पाठ के संस्करण मंदिर और परंपरा के अनुसार भिन्न होते हैं।
- शिक्षा मंत्रालय, "संशोधित मंदारिन शब्दकोश", प्रविष्टि "महाकरुणा मंत्र" (प्रचलित स्रोत और विभिन्न सूत्र-संस्करणों में मंत्र-पाठ के अंतर)
- राष्ट्रीय ताइवान विश्वविद्यालय का बौद्ध अध्ययन डिजिटल पुस्तकालय: "महाकरुणा मंत्र: मंदिरों में पढ़े जाने वाले संस्करण का चीनी-संस्कृत ध्वनि-साम्य और अनुवाद"
- Dharma Drum Mountain: "गृहस्थ घर पर पाठ कैसे करें?" (सुबह-शाम की साधना की सामग्री, आवृत्ति और लचीली व्यवस्था)
- CBETA – Chinese Buddhist Electronic Text Association: ताइशो T20 No.1060, महाकरुणा धारणी सूत्र (千手千眼觀世音菩薩廣大圓滿無礙大悲心陀羅尼經) (थांग राजवंश, भगवद्धर्म द्वारा अनूदित; मंत्र का वाक्य-दर-वाक्य क्रमांक 82वें वाक्य तक)
- गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय धार्मिक सूचना नेटवर्क: "मंत्र-जाप" (राष्ट्रीय चेंगची विश्वविद्यालय के धर्म-अध्ययन स्नातकोत्तर संस्थान की Li Yu-chen द्वारा लिखित: मंत्र-साधना बुद्धधर्म के अनुरूप और साधना को आगे बढ़ाने वाली होनी चाहिए)
अपने महाकरुणा मंत्र का संस्करण पहले शिक्षिका को दिखाएँ
पता नहीं कि किस संस्करण का अनुसरण करें और साँस कहाँ लें? अपनी सूत्र-पुस्तक का आवरण और भीतर के पृष्ठ फ़ोटो लें, और शिक्षिका को बताएँ कि आप मंदारिन, ताइवानी या किसी साधना-केंद्र का पाठ सीखना चाहते हैं।
LINE पर कक्षा के बारे में पूछें LINE ID: @722chssi