नागरिक संहिता|第 153 條|कानूनी मामले|अधिनियम|लागू
第 一 章/第 一 節|法務部|v1.0
प्रभावी तिथि: 9999-12-31|अंतिम संशोधन: 2021-01-20
जब पक्षकारों की परस्पर आशय-अभिव्यक्ति में सहमति हो, चाहे वह स्पष्ट हो या मौन, अनुबंध स्थापित हो जाएगा। यदि पक्षकार आवश्यक बिंदुओं पर सहमत हों, और अनावश्यक बिंदुओं पर आशय-अभिव्यक्ति न की गई हो, तो अनुबंध स्थापित माना जाएगा; उन अनावश्यक बिंदुओं पर पक्षकारों की मंशा असंगत होने पर न्यायालय मामले की प्रकृति के अनुसार उन्हें निर्धारित करेगा।